मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 27
उच्छ्रायात् सप्तगुणादशीतिभागः पृथुत्वमेतेषाम् । नवगुणितेऽ शीत्यंशः स्तम्भस्य दशांशहीनोऽग्रे ॥
राजा के द्वार की ऊँचाई को ७ से गुजर कर ८० का भाग देने पर जो लब्धि प्राप्त हो, ततुल्य शाखा और औदुम्बर की विस्तृर्ति बनानी चाहिये तथा स्तम्भ की ऊँचाई को ९. से गुणा कर ८० से भाग देने पर जो लब्धि प्राप्त हो, ततुल्य स्तम्भ के मूल की मोटाई और अपना दशाँ भाग होन मोटाई तुल्य अग्र भाग की मोटाई बनानी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें