उच्छ्रायहस्तसंख्यापरिमाणान्यङ्गुलानि बाहुल्यम् । शाखाद्वयेऽपि कार्य सार्धं तत् स्यादुदुम्बरयोः ॥
हस्त जाति ऊँचाई तुल्य अङ्गुल शाखाओं की मोटाई बनानी चाहिये। उस मोटाई को डेढ़ से गुणा करने पर जो प्राप्त हो, तत्तुल्य अङ्गल उदुम्बर (देहली = 'उदुम्बरस्तु देहल्यामि'ति मेदिनी) की मोटाई होनी चाहिये।
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