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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 24
एकादशभागयुतः ससप्ततिर्नृपबलेशयोर्व्यासः । उच्छ्रायोऽङ्गुलतुल्यो द्वारस्यार्धेन विष्कम्भः ॥
राजा और सेनापति-हेतु निर्मित गृह के विस्तार के एकादश भाग से युत विस्तार में ७० मिलाने पर जो प्राप्त हो, तत्तुल्य अङ्गुल प्रधान द्वार की ऊँचाई और द्वार की ऊँचाई के आधे तुल्य उसका व्यास बनाना चाहिये।
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