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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 22
विस्तारषोडशांशः सचतुर्हस्तो भवेद् गृहोच्छ्रायः । द्वादशभागेनोनो भूमौ भूमौ समस्तानाम् ॥
भवन के व्यासमान के षोडशांश में चार हाथ मिला कर जितना प्राप्त हो, उतनी प्रथम महल की ऊँचाई, उसमें उसका द्वादशांश हीन करके जो प्राप्त हो, उतनी द्वितीय महल की ऊँचाई और उसमें पुनः उसका द्वादशांश हीन करके जो प्राप्त हो, उतनी तृतीय महल की ऊँचाई इत्यादि बनानी चाहिये।
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