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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 2
किमपि किल भूतमभवद्रुन्धानं रोदसी शरीरेण । तदमरगणेन सहसा विनिगृह्याधोमुखं न्यस्तम् ॥
प्राचीन काल में अपने शरीर से पृथ्वी और आकाश को आच्छादित करने वाला कोई अपरिचित व्यक्ति उत्पन्न हुआ।
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