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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 19
त्रित्रिद्विद्विद्विसमाः क्षयक्रमादङ्गुलानि चैतेषाम् । व्येका विंशतिरष्टौ विंशतिरष्टादश त्रितयम् ॥
३ हाथ १३ अद्भुत और ३ हाथ ४ अङ्गल प्रमाण की शाला तथा क्रम से ३ हाथ १९ अङ्गुल, ३ हाथ ८ अबूल, २ हाय २० अङ्गुल, २ हाथ १८ अद्भुत और २ हाथ ३ अङ्गुल प्रमाण का अलिन्द बनाना चाहिये।
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