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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 18
हस्तद्वात्रिंशादिषु चतुश्चतुस्त्रित्रिकत्रिकाः शालाः । सप्तदशत्रितयतिथित्रयोदशकृताङ्गुलाभ्यधिकाः ॥
पूर्वोक्त ब्राह्मण आदि के क्रम से ३२, २८, २४, २० और १६ हाथ विस्तार वाले गृह में क्रम से ४ हाथ १७ अद्भुत, ४ हाथ ३ अङ्गुल, ३ हाय १५ अबूल
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