सेनापति और राजा के गृह के व्यासमान के योग में सत्तर मिला कर दो जगह रख कर एक जगह चौदह का भाग देने से शाला (गृहाभ्यन्तर भाग) और दूसरी जगह पन्द्रह का भाग देने से अलिन्द (शाला को भित्ति के बाहर सोपान मार्ग) का प्रमाण होता है।
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