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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 13
सदशांशं विप्राणां क्षत्रस्याष्टांशसंयुतं दैर्ध्यम् । षड्भागयुतं वैश्यस्य भवति शूद्रस्य पादयुतम् ।
इससे कम विस्तार का गृह नीच जातियों के लिये बनाना चाहिये। ब्राह्मणों के गृह का दैध्ये विस्तार से दशमांश अधिक, क्षत्रियों का अष्टमांश, वैश्यों का षष्ठांश और शूद्रों के गृह का दैध्यं विस्तार से चतुर्थाश अधिक होना चाहिये।
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