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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 123
भूरिपुष्पविकरं सतोरणं तोयपूर्णकलशोपशोभितम् । धूपगन्धबलिपूजितामरं ब्राह्मणध्वनियुतं विशेद् गृहम् ॥
अतिशय पुष्पों से सुवासित, तोरण से अलंकृत, जलपूर्ण कलशों से सुशोभित, धूप-गन्ध-पुष्प आदि द्वारा पूजित देवताओं से समन्वित एवं ब्राह्मणों द्वारा की गई वेदध्वनियों से पवित्र किये गये गृह में गृहस्वामी को प्रवेश करना चाहिये।
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