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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 121
मञ्जिष्ठाभे भेको नीले सर्पस्तथाऽरुणे सरटः । मुद्राभेऽश्मा कपिले तु मूषकोऽम्भश्च खड्‌गाभे ॥
तो मेढक, नीले रंग का मण्डल दिखादे तो सर्प, लाल रङ्ग का मण्डल दिखाई दे तो गिरगिट, मूंग के समान वर्ण का मण्डल दिखाई दे तो पत्थर, पीला मण्डल दिखाई दे तो चूहे और खड्ग के सदृश मण्डल दिखाई दे तो वृक्ष के मध्य में जल का निवासस्थान कहना चाहिये।
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