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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 120
छेदो यद्यविकारी ततः शुभं दारु तद्‌गृहौपयिकम् । पीते तु मण्डले निर्दिशेत् तरोर्मध्यगां गोधाम् ॥
यदि वृक्ष का कर्तित प्रदेश विकाररहित हो तो उसकी लकड़ी गृह-निर्माण के लिये शुभ होती है। यदि उसमें (कर्तित प्रदेश में पीत वर्ण का मण्डल दिखाई दे तो वृक्ष के मध्य में गोधा ( सनगोहि), मुञ्जीठ की तरह लाल रङ्ग का मण्डल दिखाई दे
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