ब्राह्मण आदि चारो वर्षों के गृहों का विस्तार क्रम से ३२ हाथ में चार-चार हाथ कम करके १६ हाथ पर्यन्त बनाना चाहिये। जैसे-३२, २८, २४, २० या १६ दाय ब्राह्मणों के गृह का: २८, २४, २० या १६ हाथ क्षत्रियों के गृह का; २४, २० या १६ हाथ वैश्यों के गृह का तथा २० या १६ हाथ शूद्रों के गृह का विस्तार बनाना चाहिये।
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