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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 118
खगनिलयभग्नसंशुष्कदग्धदेवालयश्मशानस्थान् क्षीरतरुधवविभीतकनिम्बारणिवर्जितान् छिन्द्यात् ॥
पक्षियों के घोसलों से युक्त, टूटे हुये, देवालय के समीप में स्थित, श्मशान में स्थित, दूध वाले, वच, बहेड़ा, नीम, अरलू-इन सबों को छोड़ कर शेष वृक्षों को घर बनाने के लिये काटना चाहिये।
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