मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 117
प्राच्यादिस्थे सलिले सुतहानिः शिखिभयं रिपुभयं च । स्त्रीकलहः स्त्रीदौष्ट्यं नैः स्व्यं वित्तात्मजविवृद्धिः ॥
वास्तु स्थान से पूर्व आदि दिशाओं में यदि जल स्थित हो तो क्रम से पुत्र का नाश, अग्निभय, शत्रुभय, स्त्रियों में कलह, स्त्रियों में दुःशीलता, निर्धनता, घन की वृद्धि और पुत्रों की वृद्धि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें