वास्तु स्थान से पूर्व आदि दिशाओं में यदि जल स्थित हो तो क्रम से पुत्र का नाश, अग्निभय, शत्रुभय, स्त्रियों में कलह, स्त्रियों में दुःशीलता, निर्धनता, घन की वृद्धि और पुत्रों की वृद्धि होती है।
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