प्राग्भवति मित्रवैरं मृत्युभयं दक्षिणेन यदि वृद्धिः । अर्थविनाशः पश्चादुदग्विवृद्धिर्मनस्तापः ॥
यदि वास्तु भूमि की वृद्धि पूर्व की ओर की जाय तो मित्रों से द्वेष, दक्षिण की ओर की जाय तो मृत्यु का भय, पश्चिम की ओर की जाय तो धन का नाश और उत्तर की ओर की जाय तो मन में सन्ताप होता है।
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