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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 111
छत्रस्रगम्बरयुतः कृतधूपविलेपनः स्तम्भस्तथैव समुत्थाप्यः । कार्यों द्वारोच्छ्रायः प्रयत्ने ॥
साथ ही छत्र, माला, वस्त्र, धूप और चन्दन से विभूषित करके स्तम्भ को खड़ा करना चाहिये। इसी प्रकार द्वार को भी यत्नपूर्वक खड़ा करना चाहिये।
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