पहले उत्तर-पूर्व के कोण (ईशान कोण) में पूजन करके शिलान्यास करे, तत्पश्चात् प्रदक्षिण क्रम से शेष शिलाओं का न्यास करे। इसी क्रम से स्तम्भों का भी उत्थापन करना चाहिये।
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