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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 110
दक्षिणपूर्वे कोणे कृत्वा पूजां शिलां न्यसेत् प्रथमम् । शेषाः प्रदक्षिणेन स्तम्भाश्चैवं समुत्थाप्याः ॥
पहले उत्तर-पूर्व के कोण (ईशान कोण) में पूजन करके शिलान्यास करे, तत्पश्चात् प्रदक्षिण क्रम से शेष शिलाओं का न्यास करे। इसी क्रम से स्तम्भों का भी उत्थापन करना चाहिये।
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