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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 109
स्कन्धाच्च्युते शिरोरुक् कुलोपसगोंऽपवर्जिते कुम्भे । भग्नेऽपि च कर्मिवधश्युते कराद् गृहपतेमृत्युः ॥
यदि जल से परिपूर्ण कलश लाने के समय गिर जाय तो गृहपति को शिर का रोग, गिर कर उलट जाय तो गृहस्वामी के कुल में उपद्रव, फूट जाय तो कारीगर की मृत्यु और कलश हाथ से छूट जाय तो गृहस्वामी की मृत्यु होती है।
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