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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 108
सूत्रच्छेदे मृत्युः कीले चावाङ्मुखे महान् रोगः । गृहानाथस्थपतीनां स्मृतिलोपे मृत्युरादेश्यः ॥
यदि फैलाने के समय सूत्र टूट जाय तो गृहपति की मृत्यु होती है। गाड़ने के समय कील का मुख नीचे की तरफ हो जाय तो गृहपति को बहुत बड़ा रोग होता है। यदि उस समय गृहपति और कारीगर दोनों की स्मरण शक्ति नष्ट हो जाय तो दोनों की मृत्यु कहनी चाहिये।
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