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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 105
शकुनसमयेऽथवाऽन्ये हस्त्यश्वश्वादयोऽनुवाशन्ते । तत्प्रभवमस्थि तस्मिंस्तदङ्गसम्भूतमेवेति ॥
शकुन देखने के समय यदि दीप्त दिशा की तरफ मुख करके हाथी, घोड़ा, कुत्ता आदि जीव बोलें तो जिस स्थान पर गृहस्वामी स्थित रहता है, उसके नीचे उन जीवों के उसी अङ्ग की हड्डी होनी चाहिये, जिस अङ्ग का गृहपति स्पर्श कर रहा होता है।
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