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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 100
शस्त्रेण शस्त्रमृत्युर्बन्धो लोहेन भस्मनाग्निभयम् । तस्करभयं तृणेन च काष्ठोल्लिखिता च राजभयम् ॥
यदि उक्त रेखा शस्त्र से बनाई जाय तो ईत्र से ही गृहस्वामी की मृत्यु, लोहे से बनाई जाय तो बन्धन, भस्म से बनाई जाय तो अग्निभय, तृण से बनाई जाय तो चोरभय और काष्ठ से बनाई जाय तो राजभय होता है।
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