दुःखशत्रुनिचयस्य विनाशं पृष्ठबाहुयुगजा रचयन्ति । संयमं च मणिबन्धनजाता भूषणाद्यमुपबाहुयुगोत्थाः ॥
यदि पीठ में फुन्सी हो तो दुःखसमूह का और बाँह में हो तो शत्रुसमुदाय का नाश करती है। मणिबन्ध में हो तो हाथों का बन्धन और दोनों बाहु के समीप हो तो भूषण आदि ( अत्र, वख) का लाभ कराती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।