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बृहत्संहिता • अध्याय 52 • श्लोक 5
दुःखशत्रुनिचयस्य विनाशं पृष्ठबाहुयुगजा रचयन्ति । संयमं च मणिबन्धनजाता भूषणाद्यमुपबाहुयुगोत्थाः ॥
यदि पीठ में फुन्सी हो तो दुःखसमूह का और बाँह में हो तो शत्रुसमुदाय का नाश करती है। मणिबन्ध में हो तो हाथों का बन्धन और दोनों बाहु के समीप हो तो भूषण आदि ( अत्र, वख) का लाभ कराती है।
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