यदि शिर की सन्धि, गर्दन, हृदय, स्तन, बगल और छाती में फुन्सी हो तो क्रम से
शखपीड़ा, आपात, पुत्रलाभ, शोक और प्रिय वस्तु की प्राप्ति होती है तथा कन्ये में हो तो भिक्षा के लिये बार-बार प्रमण एवं कांख में हो तो धनों का अनेक तरह से नाश होता है।
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