यदि नासिका में फुन्सी हो तो वरसलाम, गाल में हो तो पुत्रलाभ, ओंठ और ठोड़ी में हो तो अत्रताप, ललाट तथा हनु में हो तो अधिक धनलाभ, कण्ठ में हो तो भूषण, अन और पान वस्तु का लाभ तथा कान में हो तो कान के आभूषणों का लाभ और अध्यात्म ज्ञान होता है।
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