यदि सुन्दर, निर्मल और स्पष्ट कान्ति पाली फुन्सी शिर में हो तो धनराशय, मस्तक
में हो तो शीघ्र सौभाग्य, भूयुगल में हो तो दौर्भाग्य, धूमध्य में हो तो शीघ्र इष्ट बन्धुओं का
संयोग और दुःशीलता, नेत्रपुट में हो तो शोक, थोनों नेत्रों में हो तो इशदर्शन, शंखस्थान में
हो यो प्रजन्या ( संन्यास) तथा अनुपात के स्थान में हो तो चिन्ता प्रदान करती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।