इस तरह शिर से लेकर प्रत्येक अंग को फुन्सियों के फल कहे गये हैं। इसी तरह व्रण और तिल के फल की भी कल्पना करनी चाहिये तथा प्राणियों के शरीर में मशक, चिह्न और रोमावर्तजन्य फां भी पूर्वोक्तानुसार ही प्राप्त होते हैं।
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