सितरक्तपीतकृष्णा विप्रादीनां क्रमेण पिटका ये। ते क्रमशः प्रोक्तफला वर्णानां नाग्रजातानाम् ॥
ब्राह्मण आदि चार वर्षों को क्रम से सफेद, लाल, पीली और काली फुन्सी आगे कथित फल देने वाली होती है, किन्तु ब्राह्मणों को छोड़ कर अर्थात् केवल सफेद फुन्सी ब्राह्मणों को; सफेद और लाल क्षत्रियों को; सफेद, लाल और पोलो वैश्यों को तथा सफेद ताल, पौली और काली फुन्सी शूद्रों को फल देने वाली होती है।
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