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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 9
जिह्वा प्रीवा पिण्डिके पार्ष्णियुग्मं जवे नाभिः कर्णपाली कृकाटी। खियां भूनासास्फिग्वलिकटिसुलेखाङ्गुलिचयम् ॥
भौंह, नाक, स्फिक् ( नितम्ब), त्रिवली, कमर, करमध्य की सुन्दर रेखा, अंगुली, जोभ, गर्दन, दोनों जंघाओं के पृष्ठ भाग, एड़ी, जंघा, नाभि, कर्णपाली, कुकाटी ( गर्दन का पृष्ठ-भाग) - ये सब स्त्रीसंज्ञक अंग हैं।
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