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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 8
अथाङ्गान्यूर्वोष्ठस्तनवृषणपादं च दशना भुजी हस्ती गण्डौ कचगलनखाङ्गुष्ठमपि यत् । सश कक्षांसं ब्रवणगुदसन्थीति पुरुषे
अरु, ओठ, स्तन, अण्डकोश, पाँव, दाँट, बाहु, हाथ, गाल, केश, कण्ठ, नख, अंगूठा, संख, फाँख, कन्या, कान, गुप्तेन्द्रिय, दो अंगों के सन्धि स्थान-ये सब पुरुष-संज्ञक कहे गये हैं।
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