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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 7
यात्राविधाने हि शुभाशुभं यत्प्रोक्तं निमित्तं तदिहापि वाच्यम् । दृष्ट्वा पुरो वा जनताहतं वा प्रष्टुः स्थितं पाणितलेऽथ वखे ॥
यात्रा के विधान में जो शुभाशुभ निमित्त कहे गये हैं, उन निमित्तों को सम्मुख, किसी मनुष्य से लाये हुए, प्रश्नकर्ता के हस्त में या वख में देखकर शुभाशुभ फल कहना चाहिये। जैसे सरसों, शीशा, जल और कागज देख कर शुभ तथा कपाल, औषध और काले धान्य देख कर अशुभ कहना चाहिए।
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