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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 5
प्रव्रजितनग्ननापितरिपुबन्धनसौनिकैस्तथा श्वपचैः । कितवयतिपीडितैर्युतमायुधमाध्वीकविक्रयैर्न शुभम् ॥
जहाँ पर संन्यासी, नंगे आदमी, नाई (हजाम), शत्रु, बन्धनशाला, कसाई, चाण्डाल, पूर्व, यति-ये सभी रहते हों, वहाँ प्रश्न नहीं करना चाहिये तथा शस्त्र और मद्य के विक्रयस्थान में भी प्रश्न करना अशुभ होता है।
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