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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 46
इति निगदितमेतद् गात्रसंस्पर्शलक्ष्म प्रकटमभिमताप्त्यै वीक्ष्ये शास्त्राणि सम्यक् । विपुलमतिरुदा वेत्ति यः सर्वमेत- नरपतिजनताभिः पूज्यतेऽसौ सदैव ॥
सब शास्त्रों को अच्छी तरह देख कर अभीष्ट-सिद्धि के लिये यह अति स्पष्ट 'अवयव-स्पर्शन-लक्षण' कहा गया है। जो अतिशय बुद्धिमान् उदार दैवज्ञ इसको पूर्ण रूप से जान लेता है, यह सदा राजा और प्रजा से पूजित होता रहता है।
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