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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 44
शिरोललाट भूकर्णगण्डं हनुरदा गलम्। सव्यापसव्यस्कन्यश्च हस्त हस्तौ चिबुकनालकम् ॥
'सन्तान किस नक्षत्र में उत्पत्र होगी' इस तरह के प्रश्नकाल में यदि तो शिर, ललाट, भी, कान, गाल, कनपटी, दाँत, गर्दन, दक्षिण स्कन्य, वाम स्कन्ध, दोनों हाथ, ठोड़ी, कण्ठ, छाती, दक्षिण स्तन, वाम स्तन, हृदय, दक्षिण बगल, वाम बगल, पेट, कमर, स्फिक् (कुल्ला)
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