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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 42
वेणीमूले त्रीन् सुतान् कन्यके द्वे कर्णे पुत्रान् पञ्च हस्ते त्रयं च । अङ्गुष्ठान्ते पञ्चकं चानुपूर्व्या पादाङ्गुष्ठे पार्ष्णियुग्मेऽपि कन्याम् ॥
यदि 'मुझे कितनी सन्तान होगो' इस तरह के प्रश्नकाल में त्री केशपाश का स्पर्श करे तो तीन लड़के और दो लड़कियाँ, कान का स्पर्श करे तो पाँच लड़के, हाथ का स्पर्श करे तो तीन लड़‌के, कनिष्ठा अंगुलि का स्पर्श करे तो एक लड़का, अनामिका का स्पर्श करे तो दो लड़के, मध्यमा का स्पर्श करे तो तीन लड़के, तर्जनी का स्पर्श करे तो चार लड़के, अगूठे का स्पर्श करे तो पाँच लड़के और पाँव के अंगूठे का या दोनों एड़ियों का स्पर्श करे तो केवल एक कन्या कहनी चाहिये।
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