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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 4
श्मशानशून्यायतनं चतुष्पथं तथाऽमनोज्ञं विषमं सदोषर । अवस्कराङ्गारकपालभस्मभिश्चितं तुषैः शुष्कतृर्णर्न शोभनम् ।
श्मशान, शून्य देवगृह, चौराहा, चित्त में ग्लानि उत्पत्र करने वाला, विषम (निम्नोत्रत), सदा ऊपर रहने याला, अशुद्ध फूटे भाण्ड, कोयला, आदमी की खोपड़ी, भस्म, तुष और सूखे घास से व्याप्त स्थान में प्रश्न करना अशुभ होता है।
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