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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 38
पुंस्त्रीनपुंसकाख्ये दृष्टेऽनुमिते पुरः स्थिते स्पृष्टे । तज्जन्म भवति पानान्नपुष्पफलदर्शन च शुभम् ॥
यदि गर्भिणी के प्रश्नकाल में प्रश्नकर्ता पुरुष, स्ली या नपुंसक को देखे, उसकी चिन्ता करे, उसको सम्मुख स्थित देखे या उनका स्पर्श करे तो क्रम से उसी का जन्म कहना चाहिये अर्थात् पुरुष के दर्शन आदि से पुरुष का, त्री से स्त्री का और नपुंसक से नपुंसक का जन्म कहना चाहिये। इस समय आसव, अन्न, पुष्प, फल का दर्शन शुभ होता है।
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