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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 37
दृष्टे श्रुतेऽप्यशकुने गोधामत्स्यामिषं वदेद्धक्तम् । गर्भिण्या गर्भस्य च निपतनमेवं प्रकल्पयेत्प्रश्ने ॥
यदि प्रश्नकाल में प्रश्नकर्ता अशकुन देखे या सुने तो गोह या मछली का मांस खाकर आया है-ऐसा कहना चाहिये। इसी तरह गर्भिणी के प्रश्न में गर्भस्राव को कल्पना करनी चाहिये, जैसे गर्भिणी के प्रश्नकाल में अशकुन देखे या सुने तो गर्भस्राव कहना चाहिए।
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