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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 33
कुक्षिकुचजठरजानुस्पर्शे माषाः पयस्तिलयवाग्वः । आस्वादयते चोष्ठी लिहते मधुरं रसं ज्ञेयम् ॥
यदि प्रश्न के समय कोख, स्तन, पेट और जानु का स्पर्श करे तो क्रम से प्रश्नकर्ता माष (उड़द), जल और यव खाकर आया है तथा ओठ को चबावे या चाटे तो मधुर रस खाकर आया है-ऐसा कहना चाहिए।
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