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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 32
ललाटस्पर्शनाच्छूकदर्शनाच्छालिजौदनम् उर: स्पर्शात् षष्टिकाख्यं प्रीवास्पर्शे च यावकम् ॥
यदि प्रश्नकर्ता ललाट का स्पर्श करे या शूक धान्य (यव आदि) का दर्शन करे तो साठी का चावल, छाती का स्पर्श करे तो षष्टिक (साठ रात में होने वाला) धान्य एवं गर्दन का स्पर्श करे तो यव इसने खाया है-ऐसा कहना चाहिये।
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