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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 31
अवयवमपि स्पृष्ट्वाऽन्तः स्थं दृढं मरुदाहरे- दतिबहु तदा भुक्त्वाऽत्रं संस्थितः सुहितो वदेत् ॥
यदि भीतर के दृढ अंगों को स्पर्श करके धास निकालते हुये प्रश्न करे तो प्रश्नकर्ता अधिक अब खाकर प्रसत्र पैता है-ऐमा दैवज्ञ को कहना चाहिए ।
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