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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 30
निगदितमिदं यत्तत्सर्व तुषास्थिविषादिकैः सह मृतिकरं पीडार्तानां समं रुदितक्षतैः।
नष्ट चिन्ता में प्रतिपादित पूर्वोक्त (अन्तरङ्ग इत्यादि) स्थिति यदि तुष (धान्यों की भूसी), हड्डी, विष आदि देखने के साथ अथवा रोने या छोंक के साथ हो तो रोगियों की मृत्यु होती है।
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