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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 22
शाक्योपाध्यायार्हन्निर्ग्रन्थिनिमित्तनिगमकैवतैः चौरचमूपतिवणिजां दासीयोघापणस्थवध्यानाम् ॥
यदि प्रश्नकाल में बौद्धमतानुयायी, उपाध्याय, अर्हत्, निर्ग्रन्यी, दैवज्ञ, निगम और घीवर दिखाई दे तो क्रम से चोर, सेनापति, बनियाँ, दासी, योद्धा, दुकानदार और वध- सम्बन्धी चिन्ता कहनी चाहिये ।
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