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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 21
मित्रद्यूतार्थ भवा पृच्छा वृद्धश्रावकसुपरिब्राड्दर्शने नृभिर्विहिता । गणिकानृपसूतिकार्यकृता ॥
यदि प्रश्नकाल में वृद्ध आवक (कापालिक) का दर्शन हो तो मित्र, चूत और धनसम्बन्धी चिन्ता तथा उत्तम संन्यासी का दर्शन हो तो वेश्या, राजा और प्रसूता खी के लिये चिन्ता कहनी चाहिये ।
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