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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 16
पिप्पलीमरिचशुण्ठिवारिदै रोध्रकुष्ठवसनाम्बुजीरकैः । गन्धमांसिशतपुष्पया वदेत्पृच्छतस्तगरकेण चिन्तयेत् ॥
यदि प्रश्नकाल में पीपल, मिर्च, सोंठ, मुस्ता (नागरमोथा), लोध्र, कूट, यत्र, नेत्रबाला, जौरा, गन्पपांसि (बाले छड़), सॉफ और तगर के फूल का दर्शन हो तो क्रम से स्त्री के दोष, पुरुष के दोष, रोगी, सर्वनाश, अर्थनाश
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