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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 15
तालभूर्जपटदर्शनंऽ शुकं चिन्तयेत् कचतुषास्थिभस्मगम् । व्याधिराश्रयति रज्जुजालकं वल्कलं च समवेक्ष्य बन्धनम् ॥
यदि प्रश्न करने के समय ताड़ के वृक्ष के पत्ते, भोजपत्र या वस्त्र का दर्शन हो तो यल को चिन्ता कहनी चाहिये। केश, तुष (धान्यों की भूसी), हड्डी या भस्म पर बैठा हुआ प्रश्नकर्ता प्रश्न करे तो व्याधि होती है तथा प्रश्नकाल में रस्सी का जाल और वृक्ष का खाल देखने से बन्धन होता है ।
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