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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 14
पादाङ्गुष्ठेन विलिखेद् भूमिं क्षेत्रोत्यचिन्तया । हस्तेन पादौ कण्डूयेत्तस्य दासीमयी च सा ॥
यदि प्रश्नकर्ता पाँव के अंगूठे से भूमि पर लिखे तो खेत की चिन्ता और दोनों हाथों से दोनों पाँवों को खुजलावे तो दासी की चिन्ता कहनी चाहिये।
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