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बृहत्संहिता • अध्याय 51 • श्लोक 13
विप्रयोगमुरसि स्गात्रतः कर्पटाहतिरनर्थदा भवेत् । स्यात् प्रियाप्तिरभिगृह्य कर्पटं पृच्छतश्चरणपादयोजितुः ॥
यदि प्रश्न करने वाला छाती को छूते हुए प्रश्न करे तो विप्रयोग (किसी स्नेही से वियोग) होता है। अपने शरीर से कोई यख उतारते हुए प्रश्न करे तो अनर्थ होता है और यख को पकड़ कर एक पाँव को दूसरे पाँव पर रखते हुए, प्रश्न करे तो प्रिय का लाभ होता है।
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