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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 9
यस्मिन् त्सरुप्रदेशे व्रणो भवेत् तद्वदेव खड्गस्य । वनितानामिव तिलको गुह्ये वाच्यो मुखे दृष्ट्वा ॥
जिस तरह खियों के मुख पर तिल देखकर गुह्य स्थानीय तिल बताया जाता है, उसी तरह खड्ग की मूठ में दाग देखकर उसके उसके मध्य मध्य में में व्रण (छेद) कहना चाहिये।
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