निष्पन्नो न छेद्यो निकषैः कार्यः प्रमाणयुक्तः सः । मूले प्रियते स्वामी जननी तस्याग्रतश्छिन्ने ॥
यदि खड्ग प्रमाण से अधिक हो जाय तो उसको काटना नहीं चाहिये, किन्तु घिसकर प्रमाणतुल्य करना चाहिये। यदि खड्ग को मूल भाग से काटे तो राजा और अग्रभाग से
काटे तो उसकी माता को मृत्यु होती है।
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